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#📝कविता / शायरी/ चारोळी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - चाय बेचने वाला देश बेचने लगा मालिक जताने लगा खुदको ' अब ही जनता का सेवक बताता हे खुदको गरीब की चिता पर रोटी सेकने लगा भाषणबाजी करना कोई आपसे सीखे सच बोलने वाले को नोंटो मे तौलने लगा जो सवाल करता वो देशद्रोही होता हे हर सवाल अब गुनाह बनने लगा इतनी भी क्या मजबूरी थी साहब कि देश कोही दाव लगाने लगा मयूर निमसरकार चाय बेचने वाला देश बेचने लगा मालिक जताने लगा खुदको ' अब ही जनता का सेवक बताता हे खुदको गरीब की चिता पर रोटी सेकने लगा भाषणबाजी करना कोई आपसे सीखे सच बोलने वाले को नोंटो मे तौलने लगा जो सवाल करता वो देशद्रोही होता हे हर सवाल अब गुनाह बनने लगा इतनी भी क्या मजबूरी थी साहब कि देश कोही दाव लगाने लगा मयूर निमसरकार - ShareChat