#📚कविता-कहानी संग्रह #जय माँ भारतीजय माता दी
हिन्दी कविता: सारा खेल है माया का
नम्र निवेदन हैं अनुरोध
किस बात पर करते हो क्रोध,,,
खुद के भीतर करिए शोध
किस से लेना है प्रति शोध,,,,
आखिर किस से रूठे रहे हो
और किस के काम में डाल रहे
हो तुम अवरोध,,,,
आखिर किसका है ये विरोध
अन्तर मन में करो तुम शोध,,,,
काया माया का खेल है सारा
इसमें सभी उलझ कर रहते है,,,
सम गर्मी वर्षा और ठंड सभी
यहां पर सहते है,,,,,
मृत्यु के बाद कोई जलकर
माटी बन जाए कोई होके दफ्न
माटी बन जाए सब की एक सी होती गति है,,,,,
फिर किसको क्या है यहां पर कहना और किस बात का तुम्
लोगे प्रति शोध,,,,,
अन्तर मन में करिए शोध
आखिर किसपर करते हो
क्रोध,,,,,,,
यह सारा खेल है माया पति का
वही सत्य का सार है उसी के कृपा से मुक्ति मिलती वही सब का करते उधार है,,,,🙏🏻💐
कवि: रमेश हरीशंकर तिवारी
( रसिक भारती ) #मुम्बईकर🖋️🙏

