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#हरि तुम हरो जन की भीर।
हरि तुम हरो जन की भीर। - हरि तुम हरो जन की भीर। द्रोपदी की लाज राखी, तुम बढायो चीर।। नरहरि, धरयो आप शरीर। भक्त कारण रूप हिरणकश्यपु मार दीन्हों , धरयो नाहिंन धीर।। गजराज राखे, कियो बाहर नीर। बूडते ' दासि 'मीरा लाल गिरिधर, दुःख जहाँ तहॅँ पीर।। हरि तुम हरो जन की भीर। द्रोपदी की लाज राखी, तुम बढायो चीर।। नरहरि, धरयो आप शरीर। भक्त कारण रूप हिरणकश्यपु मार दीन्हों , धरयो नाहिंन धीर।। गजराज राखे, कियो बाहर नीर। बूडते ' दासि 'मीरा लाल गिरिधर, दुःख जहाँ तहॅँ पीर।। - ShareChat