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Pॐ घृ‍णिं सूर्य्य: आदित्य: ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।। ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:। ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ । ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः ।ॐ सूर्याय नम: ।ॐ घृणि सूर्याय नम: । #🥰Express Emotion
🥰Express Emotion - जैसे सूर्य के उदय होते ही अंधकार विलनुप्त हयो जाता है, वैसे ही सूर्य देव की कृपा से मनुष्य के जीवन से दुखों और अज्ञानता का अंधेरा मिट जाता है जैसे सूर्य के उदय होते ही अंधकार विलनुप्त हयो जाता है, वैसे ही सूर्य देव की कृपा से मनुष्य के जीवन से दुखों और अज्ञानता का अंधेरा मिट जाता है - ShareChat