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#❤️जीवन की सीख #😇 चाणक्य नीति #💓 फ़ौजी के दिल की बातें #☝ मेरे विचार #👩‍🎨WhatsApp प्रोफाइल DP 👉 संयुक्त राष्ट्र कि स्थापना कब हुई? 👈 संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को हुई थी। 👉 ⚔️ संयुक्त राष्ट्र क्यों बनाया गया था? 👈 1. युद्ध को रोकना: द्वितीय विश्व युद्ध में करोड़ों लोग मारे गए, इसलिए भविष्य में ऐसे बड़े युद्ध रोकना जरूरी था। 2. विश्व में शांति बनाए रखना: देशों के बीच झगड़े बातचीत से हल हों। 3. मानव अधिकारों की रक्षा: लोगों के साथ अन्याय और अत्याचार को रोकना। 4. आर्थिक और सामाजिक विकास: गरीब देशों की मदद करना और विकास बढ़ाना। 👉🎯 किसलिए बनाया गया संयुक्त राष्ट्र और इसका मुख्य उद्देश्य क्या था ?👈 1. अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना 2. सभी देशों के बीच दोस्ती और सहयोग बढ़ाना 3. मानव अधिकारों की रक्षा करना 4. वैश्विक समस्याओं का समाधान करना (गरीबी, बीमारी, शिक्षा आदि हेतु) Note:- 1. अमेरिका का कोई भी राष्ट्रपति बने, वो किसी भी देश कि सरकार के मुखिया को आतंकवादी बोलकर हमला करके मार देता है, अमेरिका खुद को पूरे विश्व का स्वयं सरपंच घोषित कर रहा है फिर भी संयुक्त राष्ट्र चुप्पी साधकर बैठा है 2 . इजराइल ने तो फिलिस्तीनीयों को उनके ही देश में गजा पट्टी तक सीमित करके नरसंहार कर दिया फिर भी संयुक्त राष्ट्र चुप्पी साधकर बैठा है 3. अमेरिका को एनर्जी (डॉलर को मजबूत रखने व तेल पर अधिकार बनाने हेतु) और इजराइल को जमीन (ग्रेटर इजराइल बनाने हेतु) कि भूख है, जो साफ - साफ दिखाई दे रहा है फिर भी संयुक्त राष्ट्र चुप्पी साधकर बैठा है लिखने बैठा तो बहुत से ऐसे प्वाइंट है कि जिनका उल्लंघन गिने - चुने देश धड़ल्ले से खुलेआम कर रहे हैं जो संयुक्त राष्ट्र के अधीन आते हैं, फिर भी संयुक्त राष्ट्र चुप्पी साधकर बैठा है 👉 जब तक पूरे विश्व कि जनता #संयुक्त_राष्ट्र के नाम से सोशल मिडिया पर हर प्वाइंट को लेकर आंदोलन नही चलाएगी, तब तक अमेरिका (ट्रंप) और इजराइल (नेत्यानहू) जैसे देश, विश्व के हर देश में किसी ना किसी रूप में नरसंहार करते ही रहेगें । संयुक्त राष्ट्र को कुंभकरण कि निद्रा से जगाने के साथ, संयुक राष्ट्र को उसकी जिम्मेदारी का एहसास कराने कि आवश्यकता है, संयुक्त राष्ट्र को अपनी ताकत दिखाने के साथ ऐसे देशों के खिलाफ युद्ध घोषित करना चाहिए जो देश स्वयं खुद को पूरे विश्व का सरपंच घोषित करता है 👇👇👇 👉 कुछ गलता लिखा या बाकी रह गया हो तो कमेंट करके जरूर बताइए जनसंघ से लेकर RSS तक के DNA में मौखिक झूठ, गुप्तचरी (मुखबिरी), गुलामी और लंगोट का कच्चा होना सदैव रहा है, जिन्हें आजादी से पहले का इतिहास नही पता है वो आज के RSS कि सभी संस्थाओं में खुले रूप से देख सकते हैं ये हमेशा से ही भारत के खिलाफ षड्यंत्र करते हुए आ रहे हैं 👇👇 👉 और यह मैं यूं ही नही कह रहा हूं बल्कि आप खुद आंकलन कीजिए तथा निष्कर्ष तक पहुंचे, 2017 से ही RSS वाले मोदी - शाह अमेरिका सहीत चीन के साथ कई देशों के दबाव में नजर आ गए थे किंतु गोदी मिडिया व बीजेपी आईटी सेल के दो रुपए वाले अंधभक्त मजदूर देश कि जनता को झूठ के मायाजाल से बांधते हुए आ रहे हैं अब विश्व कि जनता जागरूक हो गई है जिन्हें किसी भी देश कि पार्टी अपने हिसाब के परसेप्शन बनाकर हांक नही सकती है 👇👇👇 NOTE:- 2017 में ही मोदी सहित उनके अनेकों सहभागी एप्स्टीन फाइल के विडियो में लंगोट के कच्चे होने कि वजह से अटक चुके हैं कमाल कि बात तो यह है कि गोदी मिडिया और बीजेपी आईटी सेल के दो रुपए वाले अंधभक्त मजदूर आज भी देश कि जनता को मूर्ख समझते हुए मोदी के डंके का प्रोपगंडा चलाने से बाज नही आ रहे हैं 👇👇👇 👉 जो आजादी से पहले जनसंघ (RSS) वालों के देश के प्रति देशद्रोही षडयंत्र को नही मान रहे हैं वो 2014 से लेकर आज तक कि केंद्र सरकार के सभी कार्य/ कानून/ विदेश नीति का गहनता से आंकलन करें, तब आप खुद निष्कर्ष तक पहुंच जाओगे (मोदी कैबिनेट ही नही बल्कि पूरी RSS चीन और अमेरिका के समक्ष लेटी हुई है)
❤️जीवन की सीख - दिमाग कि बत्ती जला लो गोदी मिडिया और बीजेपी आईटी सेल की यह बात बिल्कुल सच है कि १९७१ में भारत पाकिस्तान युद्ध में ईरान ने भारत कि मदत नही कि थी क्योंकि १९७९ तक ईरान में मोहम्मद रज़ा शाह पहलवी का मोहम्मद रज़ा शाह पहलवी शासन था और  "पिट्ठु" था ठीक ऐसे ही जैसे भारत अमेरिका का "पिट्ठु" कि सत्ता में २०१४ के बाद से अमेरिका के को बैठाया गया है, तब से ही भारत को ईरान से दूर किया गया है आगे आप खुद समझदार हो इसलिए अपनी बुद्धि का उपयोग करते हुए "निष्कर्ष" तक इतिहास और वर्तमान कि तुलना करके पहुंचे। देश कि आत्मा है संविधान और जो संस्था , पार्टी और व्यक्ति, संविधान के प्रावधानों का सम्मान नही करता , वो सिर्फ देशद्रोही है दिमाग कि बत्ती जला लो गोदी मिडिया और बीजेपी आईटी सेल की यह बात बिल्कुल सच है कि १९७१ में भारत पाकिस्तान युद्ध में ईरान ने भारत कि मदत नही कि थी क्योंकि १९७९ तक ईरान में मोहम्मद रज़ा शाह पहलवी का मोहम्मद रज़ा शाह पहलवी शासन था और  "पिट्ठु" था ठीक ऐसे ही जैसे भारत अमेरिका का "पिट्ठु" कि सत्ता में २०१४ के बाद से अमेरिका के को बैठाया गया है, तब से ही भारत को ईरान से दूर किया गया है आगे आप खुद समझदार हो इसलिए अपनी बुद्धि का उपयोग करते हुए "निष्कर्ष" तक इतिहास और वर्तमान कि तुलना करके पहुंचे। देश कि आत्मा है संविधान और जो संस्था , पार्टी और व्यक्ति, संविधान के प्रावधानों का सम्मान नही करता , वो सिर्फ देशद्रोही है - ShareChat