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hindi kahani - कठिन है नदियों का, वीरों का, मूल जानना बड़ा धनुष छोड़ कर और गोत्र क्या होता रणधीरों का? पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर, जाति-्जाति का शोर मचाते केवल कायर क्रूर। दिनकर उम्दा पक्तिया कठिन है नदियों का, वीरों का, मूल जानना बड़ा धनुष छोड़ कर और गोत्र क्या होता रणधीरों का? पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर, जाति-्जाति का शोर मचाते केवल कायर क्रूर। दिनकर उम्दा पक्तिया - ShareChat