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#poetry - त्योहार में सब साथ थे होने का कोई नहीं  था। पर H मतलच हँसी थी॰ रस्में थीं, बस दिल शामिल नहीं थे। निभाया   गया মন जेसे कोई काम। और बीच में एक चुप्पी जो बोलने सेज़्यादा कह गई। Saina  Shikha त्योहार में सब साथ थे होने का कोई नहीं  था। पर H मतलच हँसी थी॰ रस्में थीं, बस दिल शामिल नहीं थे। निभाया   गया মন जेसे कोई काम। और बीच में एक चुप्पी जो बोलने सेज़्यादा कह गई। Saina  Shikha - ShareChat