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तन्हाई का आलम जहां शब्द भी अकेला रह जाते हैं. और हया ये दुनिया देखते रह जाती है। तमाशा भरपूर होता है। जहां हमारी कहानी बन जाती है। कुमार गुप्ता #☝ मेरे विचार #📒 मेरी डायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #💔दर्द भरी कहानियां #💝 शायराना इश्क़
☝ मेरे विचार - तन्हाई का आलम जहां शब्द भी अकेले रह जाते हैं. देखते रह जाती है। दुनिया और हया ये तमाशा भरपूर होता है। जहां हमारी कहानी बन जाती है। कुमार गुप्ता तन्हाई का आलम जहां शब्द भी अकेले रह जाते हैं. देखते रह जाती है। दुनिया और हया ये तमाशा भरपूर होता है। जहां हमारी कहानी बन जाती है। कुमार गुप्ता - ShareChat