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#spiritual #social trend
spiritual #social trend - क्रौत काहे लेही , काशी बिना भजन नही ढंग रे | कोटि ग्रंथ का योहि अर्थ है ? I सत्संग करो साध कबीर साहेब ने कहा है कि पंडितों के बहकावे में आकर भोली जनता ने काशी में करौत से गर्दन भी কিন্তু यह मोक्ष मार्ग नर्हीं है। कटवा दी मोक्ष मार्ग के लिए सच्चे संत की शरण में जाने का परमात्मा ने का समर्थन गीता जी ने किया है। आदेश दिया है। इसी क्रौत काहे लेही , काशी बिना भजन नही ढंग रे | कोटि ग्रंथ का योहि अर्थ है ? I सत्संग करो साध कबीर साहेब ने कहा है कि पंडितों के बहकावे में आकर भोली जनता ने काशी में करौत से गर्दन भी কিন্তু यह मोक्ष मार्ग नर्हीं है। कटवा दी मोक्ष मार्ग के लिए सच्चे संत की शरण में जाने का परमात्मा ने का समर्थन गीता जी ने किया है। आदेश दिया है। इसी - ShareChat