कुण्डलिया -
तितली जैसी कामना, करनी मक्खीचूस ।
यदि मिलता है फल नही, होते हैं मायूस ॥
होते हैं मायूस , वहीं जो भाग भरोसे ।
बना बनाया भोग, उसे बस मिले परोसे ॥
उधर फिसलता वक्त, रहे जैसे जल मछली ।
रहता खाली हाथ , बिना पकड़े ज्यों तितली ॥ #कविता #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 #📚कविता-कहानी संग्रह


