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#राष्ट्रप्रेमऔर हमारी संस्कृति
राष्ट्रप्रेमऔर हमारी  संस्कृति - २६ जनवरी में शायरी बोले। ना पूछो ज़माने से कि क्या हमारी  8, हमारी கி पहचान तो यही है कि हम हिंदुस्तानी हैं। जो अब तक ना खोला खून पानी नहीं है, जो देश के काम ना आए वो बेकार जवानी है। पानी न हो तो नदियाँ किस काम की आँसू न हो तो आँखें किस काम की दिल न हो तो धड़कन किस काम की अगर हम वतन के काम न आए तो यह ज़िंदगी किस काम की। तैरना है तो समंदर में तैरो, नदी या नालों में क्या है। प्यार करना है तो वतन से करो, इन रखा چ4!7` लोगों में क्या रखा है। २६ जनवरी में शायरी बोले। ना पूछो ज़माने से कि क्या हमारी  8, हमारी கி पहचान तो यही है कि हम हिंदुस्तानी हैं। जो अब तक ना खोला खून पानी नहीं है, जो देश के काम ना आए वो बेकार जवानी है। पानी न हो तो नदियाँ किस काम की आँसू न हो तो आँखें किस काम की दिल न हो तो धड़कन किस काम की अगर हम वतन के काम न आए तो यह ज़िंदगी किस काम की। तैरना है तो समंदर में तैरो, नदी या नालों में क्या है। प्यार करना है तो वतन से करो, इन रखा چ4!7` लोगों में क्या रखा है। - ShareChat