इस दोहे का अर्थ है:
"न मोह न माया न ममता का बंधन
जिंदगी से मौत तक
महादेव सब अलग निरंजन"
इसमें कहा गया है कि जीवन में न तो मोह (आसक्ति), न माया (धन-दौलत), और न ही ममता (प्रेम या स्नेह) का बंधन होना चाहिए। जीवन से लेकर मृत्यु तक, महादेव (शिव) ही सब कुछ हैं और वे निरंजन (निर्मल, पवित्र) हैं।
यह दोहा उमंग सुल्लेरे लेखक द्वारा लिखा गया है, जो जनपद महोबा, उत्तर प्रदेश से हैं।
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