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#🤲इस्लाम की प्यारी बातें
🤲इस्लाम की प्यारी बातें - अल्लाह की याद (ज़िक्र) अल्लाह की याद दिलों को सुकून देती है और परेशानियों का बोझ हल्का कर देती 81 जो इंसान ज़िक्र को अपनी आदत बना लेता है, उसका दिल ज़िंदा रहता है और वह ग़फ़लत से बचा रहता है। ज़िक्र सिर्फ़ तस्बीह पढ़ना नहीं, बल्कि हर हाल में अल्लाह को याद रखना है। सुबह-शाम ज़िक्र करने से दिन में बरकत से हिफ़ाज़त होती है। आती है और बुराइयों नबी ब& ने बताया कि ज़िक्र करने वाला और न करने वाला ज़िंदा और मुर्दा के 81 बराबर इसलिए ज़िक्र को अपनी जिंदगी का चाहिए। কিম্সো ননানা fags हवालाः सहीह S, दावत, हदीस ६४०७ हर रोज इस्लामिक वीडियो देखने लिए फॉलो करें 3 अल्लाह की याद (ज़िक्र) अल्लाह की याद दिलों को सुकून देती है और परेशानियों का बोझ हल्का कर देती 81 जो इंसान ज़िक्र को अपनी आदत बना लेता है, उसका दिल ज़िंदा रहता है और वह ग़फ़लत से बचा रहता है। ज़िक्र सिर्फ़ तस्बीह पढ़ना नहीं, बल्कि हर हाल में अल्लाह को याद रखना है। सुबह-शाम ज़िक्र करने से दिन में बरकत से हिफ़ाज़त होती है। आती है और बुराइयों नबी ब& ने बताया कि ज़िक्र करने वाला और न करने वाला ज़िंदा और मुर्दा के 81 बराबर इसलिए ज़िक्र को अपनी जिंदगी का चाहिए। কিম্সো ননানা fags हवालाः सहीह S, दावत, हदीस ६४०७ हर रोज इस्लामिक वीडियो देखने लिए फॉलो करें 3 - ShareChat