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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - संसार अपनी ही गति से चल रहा है। यहां पल प्रति पल परिवर्तन की बयार बह रही है। गतिमान होना ही जीवंतता की निशानी है। हमारी मूल व्यथा यही है कि हम अपने भविष्य की चिंता करते हैं और वर्तमान को खो देते हैं यही हमारे दुःख का मूल कारण है।हम वर्तमान समय को उसके महत्व को पहचान ही नहीं पाते हैं या उसकी कदर नहीं करते।हम चिंता घर हो गये है। चिंता चिता समान है। यह हमारे वर्तमान को लील जाती है और हमारी खिलावट की सबसे बड़ी बाधा है। हमें विधायक सोच रखनी चाहिए क्योंकि नकारात्मक ऊर्जा तब ही हमसे दूर रहेगी। शायद इसी वजह से शोधकर्ताओं ने रक्त समूह को नाम दे दिया संसार अपनी ही गति से चल रहा है। यहां पल प्रति पल परिवर्तन की बयार बह रही है। गतिमान होना ही जीवंतता की निशानी है। हमारी मूल व्यथा यही है कि हम अपने भविष्य की चिंता करते हैं और वर्तमान को खो देते हैं यही हमारे दुःख का मूल कारण है।हम वर्तमान समय को उसके महत्व को पहचान ही नहीं पाते हैं या उसकी कदर नहीं करते।हम चिंता घर हो गये है। चिंता चिता समान है। यह हमारे वर्तमान को लील जाती है और हमारी खिलावट की सबसे बड़ी बाधा है। हमें विधायक सोच रखनी चाहिए क्योंकि नकारात्मक ऊर्जा तब ही हमसे दूर रहेगी। शायद इसी वजह से शोधकर्ताओं ने रक्त समूह को नाम दे दिया - ShareChat