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#👌બેસ્ટ સ્ટેટ્સ📱 #🙏 જય શ્રી કૃષ્ણ #🙏ભક્તિ સ્ટેટ્સ
👌બેસ્ટ સ્ટેટ્સ📱 - बड़े भाग मानुष तनु पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथन्हि गावा।l  साधन धाम मोच्छ कर द्वारा। पाइ न जेहिं परलोक सँवारा ।| (रामचरितमानस, उत्तरकांड) भावार्थ : 0 तुलसीदास जी कहते हैं कि बडे सौभाग्य से मानव शरीर प्राप्त होता है। देवताओं (सुर) के लिए भी यह दुर्लभ है; ऐसा सभी ग्रंथ (शास्त्र, पुराण आदि) गाते हैं। यह शरीर साधना का धाम और मोक्ष का द्वार है। इसे पाकर भी जिसने r दुरभाग्यशाली है। परलोक (मोक्ष। उद्दार) नहीं संवारा, वह बड़ा ` व्याख्या   ८४ लाख योनियों में भटकने के बाद मानव देह मिलती है। बाकी योनियाँ केवल भोग की हैं वहाँ न विवेक है न साधना। मानव योनि ही ऐसी है जहाँ सत्य-असत्य का बोध और मुक्ति का चुनाव संभव है। देवता भी भोग-विलास में लीन रहते हैं, उनके पास अमरत्व जैसा सुख है, लेकिन मोक्ष ्साधना का उत्साह कम होता है। इसलिए वे भी मानव-्जन्म की कामना करते हैं । बड़े भाग मानुष तनु पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथन्हि गावा।l  साधन धाम मोच्छ कर द्वारा। पाइ न जेहिं परलोक सँवारा ।| (रामचरितमानस, उत्तरकांड) भावार्थ : 0 तुलसीदास जी कहते हैं कि बडे सौभाग्य से मानव शरीर प्राप्त होता है। देवताओं (सुर) के लिए भी यह दुर्लभ है; ऐसा सभी ग्रंथ (शास्त्र, पुराण आदि) गाते हैं। यह शरीर साधना का धाम और मोक्ष का द्वार है। इसे पाकर भी जिसने r दुरभाग्यशाली है। परलोक (मोक्ष। उद्दार) नहीं संवारा, वह बड़ा ` व्याख्या   ८४ लाख योनियों में भटकने के बाद मानव देह मिलती है। बाकी योनियाँ केवल भोग की हैं वहाँ न विवेक है न साधना। मानव योनि ही ऐसी है जहाँ सत्य-असत्य का बोध और मुक्ति का चुनाव संभव है। देवता भी भोग-विलास में लीन रहते हैं, उनके पास अमरत्व जैसा सुख है, लेकिन मोक्ष ्साधना का उत्साह कम होता है। इसलिए वे भी मानव-्जन्म की कामना करते हैं । - ShareChat