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#भगवत गीता #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓
भगवत गीता - 1 सर्वाणि कर्माणि मयि सन्नयस्य मत्पराः| अनन्येनैव यगनमा ध्ययन्तउपसता परन्तु जो मेरे परायण रहने चाले भक्तजन सम्पूर्ण कमां कामुझम अपण करक मझ सग्रणरूप परमेश्वर कोही अनन्य भक्तियोग सिे निखन्तर चिन्तन करते हए भजतह। इस श्लक का विशेष লিৎ गीता अध्याय १ श्लोक ५५ भाव जाननेकि चाहिए देखना ग्ाख्यलोग  Ib II श्री कृष्ण कह रहे हैं किजो अपने सभी कर्मों कोॅमुझसे संबंधित मानते हए मेरे प्रति पूर्ण % औरॅ समर्पण खखते है औरजो केवल मेरी मे तल्लीन रहते हैचे मरलिए अनन्य भक्ति करते है।यलोग योग के माध्यम से अथत ध्यान ओर भक्ति के माध्यम से॰ मुझमे पूर्ण रूप से समर्पित् रहतेहै और केवल मुझेही अपना एकमात्र लक्ष्य मानतेहै। 1 सर्वाणि कर्माणि मयि सन्नयस्य मत्पराः| अनन्येनैव यगनमा ध्ययन्तउपसता परन्तु जो मेरे परायण रहने चाले भक्तजन सम्पूर्ण कमां कामुझम अपण करक मझ सग्रणरूप परमेश्वर कोही अनन्य भक्तियोग सिे निखन्तर चिन्तन करते हए भजतह। इस श्लक का विशेष লিৎ गीता अध्याय १ श्लोक ५५ भाव जाननेकि चाहिए देखना ग्ाख्यलोग  Ib II श्री कृष्ण कह रहे हैं किजो अपने सभी कर्मों कोॅमुझसे संबंधित मानते हए मेरे प्रति पूर्ण % औरॅ समर्पण खखते है औरजो केवल मेरी मे तल्लीन रहते हैचे मरलिए अनन्य भक्ति करते है।यलोग योग के माध्यम से अथत ध्यान ओर भक्ति के माध्यम से॰ मुझमे पूर्ण रूप से समर्पित् रहतेहै और केवल मुझेही अपना एकमात्र लक्ष्य मानतेहै। - ShareChat