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basant panchami - बSh aireqhatती पूजा ) ज्ञान, कला और विद्या का महापर्व  ~ @dhamg  बसंत पंचमी क्या है? बसंत पंचमी क्या है? माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला पवित्र पर्व। माँ सरस्वती ~ विद्या , बुद्धि, संगीत, कला और वाणी की देवी को समर्पित।  इसी दिन से बसंत ऋतु की आधिकारिक शुरुआत मानी जाती है। इस दिन का महत्व ज्ञान और शिक्षा का पर्व ಹ ೩೫ ' शुरुआत (अबूझ मुहूर्त) नए कार्यो प्रकृति का उत्सव सरसों के पीले फूल, सुहावना मौसम  विद्यार्थियों, शिक्षकों और कलाकारों के लिए विशेष दिन पीले रंग का महत्व ज्ञान, ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक बसंती वस्त्र, हल्दी, पीले फूल और पीले प्रसाद का प्रयोग  पौराणिक कथा ( संक्षेप में) सृष्टि के प्रारंभ में संसार मौन था।  ब्रह्मा जी ने जल छिड़का और माँ सरस्वती प्रकट हुई।  " माँ सरस्वती ने वीणा बजाई जिससे ध्वनि, भाषा और ज्ञान उत्पन्न हुआ। इसलिए इस दिन को सरस्वती जयंती भी कहते हैं। 1 सरस्वती पूजा विधि (स्टेप्स  बड़े टेक्स्ट में)   स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें। २] माँ सरस्वती की प्रतिमा को पीले वस्त्र पर स्थापित करें। ३ पीले फूल, चंदन, अक्षत, अर्पित करें। धूप दीप  पीली मिठाई का भोग लगाऐँ।  यंत्र मा कनचेर्दत मो रहखेरधवला. .  ५ सरस्वती वंदना करेंः যরা ६ किताबें, कलम, वाद्य लिए विद्यार्थियों के विशेष महत्व पहली बार लिखना सीखना  "विद्यारंभ संस्कार " ক্ষুল-কাঁলতী স বিথীণ দুতা पुस्तक और कलम की पूजा विशेष प्रसाद (पीले व्यंजन ) बूंदी के लडूडू केसरिया खीर সীঠ বাণল बेसन के पकवान क्षेत्रीय रूप सांस्कृतिक कार्यक्रम  भव्य पंडाल , संगीत, पश्चिम बंगाल  faగTIUP . विद्यालयों में विशेष पूजा खेतों में सरसों के पंजाब हरियाणा  কুলী : का उत्सव ओडिशा  मंदिरों और संस्थानों में धूमधाम  सांस्कृतिक महत्व Goaeecoat संगीत , नृत्य और साहित्य से जुड़ा पर्व  कलाकार अपने वाद्य यंत्रों की पूँजा करते हैं "ज्ञान ज्योति जले, अज्ञान अंधकार मिटे' बSh aireqhatती पूजा ) ज्ञान, कला और विद्या का महापर्व  ~ @dhamg  बसंत पंचमी क्या है? बसंत पंचमी क्या है? माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला पवित्र पर्व। माँ सरस्वती ~ विद्या , बुद्धि, संगीत, कला और वाणी की देवी को समर्पित।  इसी दिन से बसंत ऋतु की आधिकारिक शुरुआत मानी जाती है। इस दिन का महत्व ज्ञान और शिक्षा का पर्व ಹ ೩೫ ' शुरुआत (अबूझ मुहूर्त) नए कार्यो प्रकृति का उत्सव सरसों के पीले फूल, सुहावना मौसम  विद्यार्थियों, शिक्षकों और कलाकारों के लिए विशेष दिन पीले रंग का महत्व ज्ञान, ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक बसंती वस्त्र, हल्दी, पीले फूल और पीले प्रसाद का प्रयोग  पौराणिक कथा ( संक्षेप में) सृष्टि के प्रारंभ में संसार मौन था।  ब्रह्मा जी ने जल छिड़का और माँ सरस्वती प्रकट हुई।  माँ सरस्वती ने वीणा बजाई जिससे ध्वनि, भाषा और ज्ञान उत्पन्न हुआ। इसलिए इस दिन को सरस्वती जयंती भी कहते हैं। 1 सरस्वती पूजा विधि (स्टेप्स  बड़े टेक्स्ट में)   स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें। २] माँ सरस्वती की प्रतिमा को पीले वस्त्र पर स्थापित करें। ३ पीले फूल, चंदन, अक्षत, अर्पित करें। धूप दीप  पीली मिठाई का भोग लगाऐँ।  यंत्र मा कनचेर्दत मो रहखेरधवला. .  ५ सरस्वती वंदना करेंः যরা ६ किताबें, कलम, वाद्य लिए विद्यार्थियों के विशेष महत्व पहली बार लिखना सीखना  "विद्यारंभ संस्कार " ক্ষুল-কাঁলতী স বিথীণ দুতা पुस्तक और कलम की पूजा विशेष प्रसाद (पीले व्यंजन ) बूंदी के लडूडू केसरिया खीर সীঠ বাণল बेसन के पकवान क्षेत्रीय रूप सांस्कृतिक कार्यक्रम  भव्य पंडाल , संगीत, पश्चिम बंगाल  faగTIUP . विद्यालयों में विशेष पूजा खेतों में सरसों के पंजाब हरियाणा  কুলী : का उत्सव ओडिशा  मंदिरों और संस्थानों में धूमधाम  सांस्कृतिक महत्व Goaeecoat संगीत , नृत्य और साहित्य से जुड़ा पर्व  कलाकार अपने वाद्य यंत्रों की पूँजा करते हैं "ज्ञान ज्योति जले, अज्ञान अंधकार मिटे' - ShareChat