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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - बोलिए तौ तब जब बोलिबे की बुद्धि होय, न तौ मुख मौन गहि चुप होय रहिए। जोरिएतो तब जब जोरिबै की रोति जानै, तुक छंद अरथ अनूप जामे लहिए। गाइए तौ तब जब गाइबे को कंठ होय , श्रवन के सुनत ही मनै जाय गहिए। तुकभंग, छंदभंग, अस्थ मिलै न कछु, सुंदर कहत ऐसीं बानी नहिं कहिए I बोलिए तौ तब जब बोलिबे की बुद्धि होय, न तौ मुख मौन गहि चुप होय रहिए। जोरिएतो तब जब जोरिबै की रोति जानै, तुक छंद अरथ अनूप जामे लहिए। गाइए तौ तब जब गाइबे को कंठ होय , श्रवन के सुनत ही मनै जाय गहिए। तुकभंग, छंदभंग, अस्थ मिलै न कछु, सुंदर कहत ऐसीं बानी नहिं कहिए I - ShareChat