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#જય માં કાત્યાયની દેવી #શુભ રાત્રી
જય માં કાત્યાયની દેવી - মণ্বন্টিকঞঙ ন্ি্ঃঘ্ীকঞোোএনী चंद्रहासोज्ज्चलकरा शर्दूलवराहना 11 कात्यायनी शुर्भ दद्यादेवी दानवघातिनी `  रात्रि शुभ " Gq मक्नी geelu मर्दनी मा कात्यायनी का स्वरूप अर्त्यंत भव्य ओर दिव्य हे। चे स्वर्ण के समान चमकीली ह। महिषासुर 1 हराध वर मुद्रा ्े। इनकी चार ध्रुजाए ह। दाई तरफ का ऊपर वाला हराथ अभयमुद्रार्े तथा नीचे वाला  सुशीभित है। पी के बाई तरफ के ऊपर वाले हाथ र्मे तलवार हे व नीचे वाले हाथ र्में कमल का फूत  कात्यायनी का वाहन सिंह हे।मा कात्यायनी भर्क्ता कृपा ' शीक, संताप शषय आदि सर्वथ विनषट हो जाते हे। মণ্বন্টিকঞঙ ন্ি্ঃঘ্ীকঞোোএনী चंद्रहासोज्ज्चलकरा शर्दूलवराहना 11 कात्यायनी शुर्भ दद्यादेवी दानवघातिनी `  रात्रि शुभ Gq मक्नी geelu मर्दनी मा कात्यायनी का स्वरूप अर्त्यंत भव्य ओर दिव्य हे। चे स्वर्ण के समान चमकीली ह। महिषासुर 1 हराध वर मुद्रा ्े। इनकी चार ध्रुजाए ह। दाई तरफ का ऊपर वाला हराथ अभयमुद्रार्े तथा नीचे वाला  सुशीभित है। पी के बाई तरफ के ऊपर वाले हाथ र्मे तलवार हे व नीचे वाले हाथ र्में कमल का फूत  कात्यायनी का वाहन सिंह हे।मा कात्यायनी भर्क्ता कृपा ' शीक, संताप शषय आदि सर्वथ विनषट हो जाते हे। - ShareChat