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जब आत्मा अपने विचार, वाणी और कर्म को पवित्र बनाती है, तब व्यक्तित्व से दिव्यता सहज ही प्रकट होने लगती है। ऐसे गुण न केवल स्वयं को, बल्कि आसपास के वातावरण को भी शांति और सकारात्मकता से भर देते हैं। आज आप अपने जीवन में कौन-सा एक गुण और धारण करेंगे ? @everyone #📃लाइफ कोट्स ✒️
📃लाइफ कोट्स ✒️ - जब विचार पवित्र हों, वाणी मधुर हो और कर्म श्रेष्ठ हों, वहीं दिव्यता की सुगंध होती है। BRAHMA KUMARIS @BrahmaKumarisHI जब विचार पवित्र हों, वाणी मधुर हो और कर्म श्रेष्ठ हों, वहीं दिव्यता की सुगंध होती है। BRAHMA KUMARIS @BrahmaKumarisHI - ShareChat