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#मेरे अल्फाज #👫 हमारी ज़िन्दगी #तकदीर
मेरे अल्फाज - इंसान को अपनी तक़दीर खुद ही लिखनी होती है क्योकि ये कोई चिट्ठी नहीं है जो किसी से भी लिखवा लोगे | इंसान को अपनी तक़दीर खुद ही लिखनी होती है क्योकि ये कोई चिट्ठी नहीं है जो किसी से भी लिखवा लोगे | - ShareChat