सीनाजोरी कर रही , इच्छा संशय - द्वार ।
भटक रही कमजोरियाँ , सपने सब बेकार।
सपने सब बेकार , लगे जीवन यह निष्फल।
सदा निराशा साथ, हिना भी लगती काजल ।
तन के घर में रोज , लगे होती है चोरी ।
मन - आँगन में क्रोध , करे नित सीनाजोरी ॥ #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 #कविता #📚कविता-कहानी संग्रह #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📗प्रेरक पुस्तकें📘


