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आते हैं आज महंगे कल सस्ते भी आयेंगे
कभी चल कर तेरे करीब रास्ते भी आयेंगे
न हो ग़मज़दा इन पतझड़ों से ऐ बागवां
बची हैं गर शाखें तो फ़िर से पत्ते भी आयेंगे
समय का चक्र तो घूमेगा अपने हिसाब से
आये हैं बुरे दिन तो कभी अच्छे भी आयेंगे
न हो निराश देख कर वीरानगी गुलशन की
परिंदे भी बनाने नीड़ अपना फ़िर से आयेंगे
न छोड़िये विटप की परवरिश का सिलसिला
आज आये हैं फल खट्टे कल मीठे भी आयेंगे
ज़िन्दगी के इस मेले में आयेंगे लोग कैसे कैसे
गर आयेंगे कभी शातिर तो फ़रिश्ते भी आयेंगे
🎄 सुप्रभात 🎄 #❤️जीवन की सीख

