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#✍️ साहित्य एवं शायरी #📖 कविता और कोट्स✒️ #📖Whatsapp शायरी #✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✍️ साहित्य एवं शायरी - रोज रोज जलते है फिर भी खाक ना हुए, अजीब है कुछ ख्वाब भी ॰ बुझ कर भी राख़ ना हुए॰ ! SB creation रोज रोज जलते है फिर भी खाक ना हुए, अजीब है कुछ ख्वाब भी ॰ बुझ कर भी राख़ ना हुए॰ ! SB creation - ShareChat