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#मन की बात
मन की बात - भी मुझे मिलने आओ, जब घडी को कलाई से उतार कर आना, ज़िम्मेदारियों का बोझ दरवाज़े की चौखट परही छोड़ आना। मेरे पास आओ तो सिर्फ मेरे होकर आना, जो किसी और की अमानत हो, उसे कहीं और रख कर आना। লদ্কীম 5 कोई रिश्ता , कोई नाम , कोई फ़र्ज़ न हो, और तुम, # और हमारा ख़ामोश सा सच। क्योंकि जैसे पूरी उम्र मैं तुम्हारी होकर भी बिना रहूँगी, గౌగిగి वैसे ही जब आओ सिर्फ मेरे बनकर आना। Sara भी मुझे मिलने आओ, जब घडी को कलाई से उतार कर आना, ज़िम्मेदारियों का बोझ दरवाज़े की चौखट परही छोड़ आना। मेरे पास आओ तो सिर्फ मेरे होकर आना, जो किसी और की अमानत हो, उसे कहीं और रख कर आना। লদ্কীম 5 कोई रिश्ता , कोई नाम , कोई फ़र्ज़ न हो, और तुम, # और हमारा ख़ामोश सा सच। क्योंकि जैसे पूरी उम्र मैं तुम्हारी होकर भी बिना रहूँगी, గౌగిగి वैसे ही जब आओ सिर्फ मेरे बनकर आना। Sara - ShareChat