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#❤️जीवन की सीख #📒 मेरी डायरी
❤️जीवन की सीख - ज़रूरत के हिसाब से सच बदलते रहे, आईने सामने थे फिर भी शक़्ल बदलते रहे। भूखे पेट ने शहर में सपने छोड़ दिए, और महलों में लोग मौसम बदलते रहे। में ज़िंदा रहा हर बेगुनाह, काग़ज़ों हक़ीक़त में बस फ़ैसले बदलते रहे। इल्ज़ामों ने पहन ली इज़्ज़त की पोशाक , बेधड़क जुर्म बदलते रहे। और कातिल हर मोड़ पे लिखा था नाम किसी और का, बदलते रहे। हम उम्र भर अपना पता बात ईमान की करते रहे बड़े सलीके से, और भीतर रोज़ तरीके बदलते रहे। इतिहास गवाह है इस दौर की फ़ितरत का, लोग नहीं बदले, बस चेहरे बदलते रहे। ज़रूरत के हिसाब से सच बदलते रहे, आईने सामने थे फिर भी शक़्ल बदलते रहे। भूखे पेट ने शहर में सपने छोड़ दिए, और महलों में लोग मौसम बदलते रहे। में ज़िंदा रहा हर बेगुनाह, काग़ज़ों हक़ीक़त में बस फ़ैसले बदलते रहे। इल्ज़ामों ने पहन ली इज़्ज़त की पोशाक , बेधड़क जुर्म बदलते रहे। और कातिल हर मोड़ पे लिखा था नाम किसी और का, बदलते रहे। हम उम्र भर अपना पता बात ईमान की करते रहे बड़े सलीके से, और भीतर रोज़ तरीके बदलते रहे। इतिहास गवाह है इस दौर की फ़ितरत का, लोग नहीं बदले, बस चेहरे बदलते रहे। - ShareChat