जब स्क्रीन पर दिखी हद से ज्यादा हिंसा, साइकोलॉजिकल स्टेमिना की परीक्षा लेतीं ये हॉरर फिल्में, जानिए क्यों बनीं बहस का विषय
हॉरर सिनेमा हमेशा से हमारे डर, जिज्ञासा और मानसिक सहनशक्ति की परीक्षा लेता आया है। लेकिन कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो सिर्फ डराती नहीं, वे दर्शकों की सीमाओं को तोड़ने की कोशिश करती हैं। ये फिल्में झटकों (jump scares) या भूत-प्रेत से आगे बढ़कर साइकोलॉजिकल डिस्कम्फर्ट, ब्रूटल रियल्टी, और एथिकल डिबेट्स को छूती हैं। कई बार तो सवाल उठता है, क्या डर दिखाने की भी कोई सीमा होनी चाहिए?