ShareChat
click to see wallet page
search
#Ctet2026 #psychology #📚प्रतियोगी परीक्षा विशेष🏆 #📘परीक्षा अपडेट और तैयारी💯 #📚एजुकेशनल ज्ञान📝
Ctet2026 - तुम नाटक नहीं हो, तुम दर्शक हो विचार मन का संसार चेतनाः एकमात्र दर्शक मनः एक मंच जो ये सब देख रहा है, वह मन मंच है, विचार पात्र हैं, भावनाएँ दृश्य है। कभी मंच पर नहीं आता। मंच पर क्रोथ, दुख, जीत, हार, और बही चेतना तुम हो् शांत, स्थिर, और इच्छा के दृश्य चलते रहते हैं। प्रतिक्रियाहीन। आत्मज्ञान का अर्थ नाटक नाटक बदलता रहता है। छोड़ना नहीं , अपने सत्य सुखन्दुख आते हैं, डर इच्छा बदलते हैं (चेतना) को पहचानना है। ' कहानियाँ चलती रहती हैं। देखने वाला कभी नहीं बदलता। तुम नाटक नहीं हो, तुम दर्शक हो विचार मन का संसार चेतनाः एकमात्र दर्शक मनः एक मंच जो ये सब देख रहा है, वह मन मंच है, विचार पात्र हैं, भावनाएँ दृश्य है। कभी मंच पर नहीं आता। मंच पर क्रोथ, दुख, जीत, हार, और बही चेतना तुम हो् शांत, स्थिर, और इच्छा के दृश्य चलते रहते हैं। प्रतिक्रियाहीन। आत्मज्ञान का अर्थ नाटक नाटक बदलता रहता है। छोड़ना नहीं , अपने सत्य सुखन्दुख आते हैं, डर इच्छा बदलते हैं (चेतना) को पहचानना है। ' कहानियाँ चलती रहती हैं। देखने वाला कभी नहीं बदलता। - ShareChat