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#✍️ अनसुनी शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी #💓 मोहब्बत दिल से #💞Heart touching शायरी✍️
✍️ अनसुनी शायरी - "At the end of January ;- "मैं संभालना ही नहीं चाहती अब कुछ, जो बिखर रहा है सब बिखरने दो" "At the end of January ;- "मैं संभालना ही नहीं चाहती अब कुछ, जो बिखर रहा है सब बिखरने दो" - ShareChat