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#💓 मोहब्बत दिल से
💓 मोहब्बत दिल से - जिस धागे की गांठ खुल सकती है, उस पर कैंची नहीं चलानी चाहिए। रिश्ते धैर्य से सुलझते हैं, जल्दबाज़ी से टूटते हैं। पर्स को कहाँ मालूम कि पैसे उधार के हैं, वह तो बस फूलता है। ठीक वैसे ही हमारी साँसें भी प्रभु की उधार हैं, फिर गुमान किस बात का? Sueta Sinch जिस धागे की गांठ खुल सकती है, उस पर कैंची नहीं चलानी चाहिए। रिश्ते धैर्य से सुलझते हैं, जल्दबाज़ी से टूटते हैं। पर्स को कहाँ मालूम कि पैसे उधार के हैं, वह तो बस फूलता है। ठीक वैसे ही हमारी साँसें भी प्रभु की उधार हैं, फिर गुमान किस बात का? Sueta Sinch - ShareChat