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✍️ साहित्य एवं शायरी - घूमता हूं "दर-बदर", मगर " आवारा" नहीं हूं मैं. ! 'কালান' का मारा हुआ हू, पर " बेचारा" नहीं हूं मैं. ! ; "जिंदगी" हस मत ए "गिरता हुआ" देखकर. ! मुझे फ़िर " संभल जाऊंगा" अभी "हारा" नहीं हूं मैं. ! घूमता हूं "दर-बदर", मगर " आवारा" नहीं हूं मैं. ! 'কালান' का मारा हुआ हू, पर " बेचारा" नहीं हूं मैं. ! ; "जिंदगी" हस मत ए "गिरता हुआ" देखकर. ! मुझे फ़िर " संभल जाऊंगा" अभी "हारा" नहीं हूं मैं. ! - ShareChat