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#सत_भक्ति_संदेश
सत_भक्ति_संदेश - सेवा कौन कर सकता है वही शूरवीर, जिसमें अहंकार की बू तक न हो और जिसमें आत्मनसर्म्पण का भाव हो । प्रत्येक सतसंगी को यह सच्चाई समझ लेनी चाहिए कि मालिक की दया प्राप्त करने का सेवा से बढ़कर और कोई जरिया या साधन नहीं | तुम तन से सेवा करो॰ मन से करो, धन से करो परन्तु हर दशा में अहंकार छोड़ दो " मैं " छोड़ दो | सेवा के लिए तुम्हें पवित्र रहना होगा ओर अपने स्वामी की प्रसन्नता के सिवा और कोई ख्याल न आने देने होंगे | अगर यह अंग कायम रख सकते हा तो तभी सेवा सफल हो सकती है | सेवा कौन कर सकता है वही शूरवीर, जिसमें अहंकार की बू तक न हो और जिसमें आत्मनसर्म्पण का भाव हो । प्रत्येक सतसंगी को यह सच्चाई समझ लेनी चाहिए कि मालिक की दया प्राप्त करने का सेवा से बढ़कर और कोई जरिया या साधन नहीं | तुम तन से सेवा करो॰ मन से करो, धन से करो परन्तु हर दशा में अहंकार छोड़ दो " मैं " छोड़ दो | सेवा के लिए तुम्हें पवित्र रहना होगा ओर अपने स्वामी की प्रसन्नता के सिवा और कोई ख्याल न आने देने होंगे | अगर यह अंग कायम रख सकते हा तो तभी सेवा सफल हो सकती है | - ShareChat