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#जीवन की सच्चाई
जीवन की सच्चाई - बेटी की विदाई (कविता ) विदाई का कन्यादान   हुआ जब प्लूरा , आया समय  हुआ था,सारी रस्म अदाई का Il हँसी काम खगी खन उस कातर स्वर ने॰ बाबुल को झकझोर दिया।  बेटी के क्या सचमुच में छोड़ दिया।। {ச ஈி அி பபr तमने  अपने ওঁবান ন্ী तूमने मुझको कहा सदा  फुलवारी  मेरे रोने को तमने पलभर भी ॰ बिल्कुल  नहीं सहा क्था इस ऑँगन के कोने में , मेरा  कुछ नहीं  स्थान ध्यान नहीं बिल्कुल " मेरै  रोने तुमको पापा 31d d ఃT # 8f नहीं नहीं   रोकते 3m பII எIG कोई आता पास  नहीं सेसी भीक्या उदासी ह சி தி எசிதி पिता   नहीं रहसका खड़ा सुन के 43 3ாச = दौड़ ऑसू बदहवाससा पडा 31క मा को लगा गोद से कोई मानों सब कुछ छीन चला फ्ूल सभी घर की फुलवारी से॰ कौई ज्यों बीन  মসো  जाने क्या-क्या  खोया ने बेटी केजाने पर घर रोने वाला पिता भीआज फट फटकर रोया ह बेटी की विदाई (कविता ) विदाई का कन्यादान   हुआ जब प्लूरा , आया समय  हुआ था,सारी रस्म अदाई का Il हँसी काम खगी खन उस कातर स्वर ने॰ बाबुल को झकझोर दिया।  बेटी के क्या सचमुच में छोड़ दिया।। {ச ஈி அி பபr तमने  अपने ওঁবান ন্ী तूमने मुझको कहा सदा  फुलवारी  मेरे रोने को तमने पलभर भी ॰ बिल्कुल  नहीं सहा क्था इस ऑँगन के कोने में , मेरा  कुछ नहीं  स्थान ध्यान नहीं बिल्कुल " मेरै  रोने तुमको पापा 31d d ఃT # 8f नहीं नहीं   रोकते 3m பII எIG कोई आता पास  नहीं सेसी भीक्या उदासी ह சி தி எசிதி पिता   नहीं रहसका खड़ा सुन के 43 3ாச = दौड़ ऑसू बदहवाससा पडा 31క मा को लगा गोद से कोई मानों सब कुछ छीन चला फ्ूल सभी घर की फुलवारी से॰ कौई ज्यों बीन  মসো  जाने क्या-क्या  खोया ने बेटी केजाने पर घर रोने वाला पिता भीआज फट फटकर रोया ह - ShareChat