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#मेरी डायरी के पन्नों से #कृष्ण भक्ति
कृष्ण - आराध्य मेरी कविता को तुम कहते हो संगीत, मैंने अपने दर्द से ली है प्रीत। मेरेगाआत्सू झैीप्रीतब तुम्हें लगने लगे हैं गीत। ৪ী গন த নদ্কী সীন; मेरे मेरी बातों का अब तुम समझते नहीं अर्थ मेरा रोना भी নুদ্কাঠী समझ में है व्यर्थ। 4 & sk तुम्हारे ম हाथों आराध्य, काम मेरे करो अब तुम ही साध्य। কাথী ম, है जीत तुम्हारे में  6R हाथों तुम्हारे मेरे अविनाशी, अच्युत, अक्षय, # पुकारती तुम्हारी - हर पल जय जय! आराध्य मेरी कविता को तुम कहते हो संगीत, मैंने अपने दर्द से ली है प्रीत। मेरेगाआत्सू झैीप्रीतब तुम्हें लगने लगे हैं गीत। ৪ী গন த নদ্কী সীন; मेरे मेरी बातों का अब तुम समझते नहीं अर्थ मेरा रोना भी নুদ্কাঠী समझ में है व्यर्थ। 4 & sk तुम्हारे ম हाथों आराध्य, काम मेरे करो अब तुम ही साध्य। কাথী ম, है जीत तुम्हारे में  6R हाथों तुम्हारे मेरे अविनाशी, अच्युत, अक्षय, # पुकारती तुम्हारी - हर पल जय जय! - ShareChat