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#❤️अस्सलामु अलैकुम #🕋जुम्मा मुबारक🤲 #🤲 इबादत #कुरान और हदीस
❤️अस्सलामु अलैकुम - 6?35٣ C शबे कद्र कि रात फ़रिश्ते नाजिल होते हैं और वह इस रात नमाज पढने वालों के करीब से हैं तो उन फरिश्तों का  गुज़रना गुजरते नमाजियों के लिये बा बरकत होता है। ( दुर्रेमन्सूर फ़ज़ाइले औक़ात ) कीताब माहे रमजान आया सफह २७ . O FRTZRN-E-NUSTAER 6?35٣ C शबे कद्र कि रात फ़रिश्ते नाजिल होते हैं और वह इस रात नमाज पढने वालों के करीब से हैं तो उन फरिश्तों का  गुज़रना गुजरते नमाजियों के लिये बा बरकत होता है। ( दुर्रेमन्सूर फ़ज़ाइले औक़ात ) कीताब माहे रमजान आया सफह २७ . O FRTZRN-E-NUSTAER - ShareChat