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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ईंद की शाम इतनी ख़ामोश क्यों लगती है...? ईद की शाम कुछ अजीब सी लगती है. रमजान में वक़्त घर का माहैल कितना अलग होता था। इसी कहीं इफ्तार की तैयारी चल रही होती थी, कोई खजूर रख रहा होता था, कोई दस्तरख़्बान सजा रहा होता 2 और सबको बस अज़ान का इंतज़ार होता था। लेकिन ईद के दिन उसी वक़्त सब कुछ अचानक बहुत ख़ामोश सा लगने लगता है। न इफ्तार की तैयारी... न अज़ान का इंतज़ार.. न वो रोज़ा खोलने की खुशी. तभी दिल को एहसास होता है कि सच में हमसे रुख़्सत हो चुका है। रमज़ान और दिल से बस यही दुआ निकलती है خیش ںیبم या अल्लाह! अगर हमने इस रमज़ान में कोई कमी कर दी हो तो हमें माफ फरमा , और हमें अगला रमज़ान देखने की तौफ़ीक़ अता फरमा। आमीन ईंद की शाम इतनी ख़ामोश क्यों लगती है...? ईद की शाम कुछ अजीब सी लगती है. रमजान में वक़्त घर का माहैल कितना अलग होता था। इसी कहीं इफ्तार की तैयारी चल रही होती थी, कोई खजूर रख रहा होता था, कोई दस्तरख़्बान सजा रहा होता 2 और सबको बस अज़ान का इंतज़ार होता था। लेकिन ईद के दिन उसी वक़्त सब कुछ अचानक बहुत ख़ामोश सा लगने लगता है। न इफ्तार की तैयारी... न अज़ान का इंतज़ार.. न वो रोज़ा खोलने की खुशी. तभी दिल को एहसास होता है कि सच में हमसे रुख़्सत हो चुका है। रमज़ान और दिल से बस यही दुआ निकलती है خیش ںیبم या अल्लाह! अगर हमने इस रमज़ान में कोई कमी कर दी हो तो हमें माफ फरमा , और हमें अगला रमज़ान देखने की तौफ़ीक़ अता फरमा। आमीन - ShareChat