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#इस्लाम की बाते
इस्लाम - 3 पगुनाह चाहे पहाड़ जितने ऊंचे क्यों न हों, अल्लाह की रहमत का समंदर उससे कर्हीं बड़ा 81 एक सच्चा 'अश्क॰ (आंसू) और दिल सै की गई '्तौबा' बरसों के गुनार्हों कौ धौ डालती है। कभी यह न सोचें कि आप बहुत बुरे है क्यौकि अल्लाह कौ वह गुनहगार बहुत पसंद है जो रोकर माफ़ी मांगता है।" Aqsa Olaz 3 पगुनाह चाहे पहाड़ जितने ऊंचे क्यों न हों, अल्लाह की रहमत का समंदर उससे कर्हीं बड़ा 81 एक सच्चा 'अश्क॰ (आंसू) और दिल सै की गई '्तौबा' बरसों के गुनार्हों कौ धौ डालती है। कभी यह न सोचें कि आप बहुत बुरे है क्यौकि अल्लाह कौ वह गुनहगार बहुत पसंद है जो रोकर माफ़ी मांगता है।" Aqsa Olaz - ShareChat