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प्रेम का अर्थ #प्रेम #ज़िंदगी प्रेम हैं
प्रेम - प्रेमकाअर्थ प्रेम सिर्फ शारीरिक नहीं होता, प्रेम| किसी व्यक्ति से नहीं होता, प्रेम| व्यक्तित्व से होता हैं, इंसान के। व्यवहार से होता हैं किसी की। बातो से जब मन को মিলনী ই,| खुशी किसी की परवाह जब आपको सुकून। देती हैं आप कितने अनमोल हो उसके। लिए जब कोई आपको ये महसूस। 132 कराता हैं, अपने व्यस्त समय में भी जो fg समय निकालता हैं। आपके 11 जिसको आप समझते हैं और जो आपको ! समझता हैं ऐसे इंसान से हर बार आपकोेश  कृ्योंकि प्यार किसी व्यक्ति से॰ प्यार होगा  @ గTloగ 12 a patirsinghChhote Re Chit 4೦ 7 0 7 [ 1 0    प्रेमकाअर्थ प्रेम सिर्फ शारीरिक नहीं होता, प्रेम| किसी व्यक्ति से नहीं होता, प्रेम| व्यक्तित्व से होता हैं, इंसान के। व्यवहार से होता हैं किसी की। बातो से जब मन को মিলনী ই,| खुशी किसी की परवाह जब आपको सुकून। देती हैं आप कितने अनमोल हो उसके। लिए जब कोई आपको ये महसूस। 132 कराता हैं, अपने व्यस्त समय में भी जो fg समय निकालता हैं। आपके 11 जिसको आप समझते हैं और जो आपको ! समझता हैं ऐसे इंसान से हर बार आपकोेश  कृ्योंकि प्यार किसी व्यक्ति से॰ प्यार होगा  @ గTloగ 12 a patirsinghChhote Re Chit 4೦ 7 0 7 [ 1 0 - ShareChat