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कबीर, माया काल की खानि है, धेरै त्रिगुण विपरीत । जहां जाय तहा सुख नही. या माया की रीत ।। कबीर परमेश्वर कहते है माया विपत्ति रुपी काल की वह खान है जो त्रिगुणमयी विकराल रुप धारण करती है यहा जहाँ भी जाती है वहाँ सुख चैन का नाश हो जाता है #jagatguru santrampal ji mahraj
jagatguru santrampal ji mahraj - Tiai भगवान M1 G1t के प्रति fasa संत रामपाल जी महाराज ப% qH?a q !uf और अडिग विश्वास होना चाहिए। आधा विश्वास FIP   भक्ति को कमजोर कर ~ देता है, जबकि संपूर्ण विश्वास आत्मा को स्थिर करता है। SAT KABIR SATKABIR SAT_KABIR_KI_DAYA SUPREMEGODORG KI DAYA Tiai भगवान M1 G1t के प्रति fasa संत रामपाल जी महाराज ப% qH?a q !uf और अडिग विश्वास होना चाहिए। आधा विश्वास FIP   भक्ति को कमजोर कर ~ देता है, जबकि संपूर्ण विश्वास आत्मा को स्थिर करता है। SAT KABIR SATKABIR SAT_KABIR_KI_DAYA SUPREMEGODORG KI DAYA - ShareChat