तारापीठ: जहाँ माँ काली आज भी जागृत हैं | Real Rahasyamayi Bharat | #shorts
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित तारापीठ सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि माँ काली के उग्र रूप माँ तारा की जागृत शक्तिपीठ मानी जाती है। मान्यता है कि माता सती की तीसरी आँख यहीं गिरी थी, जिस कारण यह स्थान अत्यंत शक्तिशाली बना। श्मशान भूमि पर स्थित यह मंदिर तांत्रिक साधना, रहस्यमयी घटनाओं और संत बामाखेपा की तपस्या के लिए प्रसिद्ध है।
अंग्रेज़ शासनकाल में जब तारापीठ की परंपराओं में हस्तक्षेप करने की कोशिश की गई, तो ऐसी अलौकिक घटनाएँ घटीं कि अंग्रेज अधिकारी भयभीत हो गए और उन्हें पीछे हटना पड़ा। भक्तों का विश्वास है कि माँ तारा आज भी यहाँ जागृत हैं और सच्चे मन से की गई हर प्रार्थना सुनती हैं।
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Disclaimer:
यह वीडियो धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और लोकविश्वासों पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है। इसमें बताई गई घटनाएँ ऐतिहासिक स्रोतों, जनश्रुतियों और आस्था पर आधारित हैं, जिन्हें तथ्य या प्रमाण के रूप में न लिया जाए। दर्शक अपने विवेक से जानकारी को ग्रहण करें। #जय मां तारा #maa tara #Jai Maa Tara #Jay maa tara
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