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#✍️ अनसुनी शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ अनसुनी शायरी - 87 87 ভূী मुफ़्ती 397 7 आलीम है, इश्क ज़ालिम है बहुत ज़ालिम है फ़कत ज़ालिम है, 87 87 ভূী मुफ़्ती 397 7 आलीम है, इश्क ज़ालिम है बहुत ज़ालिम है फ़कत ज़ालिम है, - ShareChat