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📚📖 #@@@ श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 18, श्लोक 62 में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को संपूर्ण भाव से उस परमेश्वर की शरण में जाने का उपदेश देते हैं, जिसकी कृपा से अर्जुन परम शांति और शाश्वत धाम (सत्यलोक) को प्राप्त कर सकेगा, जहाँ जाने के बाद जीव संसार में लौटकर नहीं आता, जिसका अर्थ है पूर्ण शांति और मोक्ष की प्राप्ति एवं श्रीमद्भागवत गीता का 8 अध्याय श्लोक 9 में कविर्देव, अर्थात् कबीर परमेश्वर जो कवि रूप से प्रसिद्ध होता है वह अनादि, सबके नियन्ता सूक्ष्मसे भी अति सूक्ष्म, सबके धारण-पोषण करनेवाले अचिन्त्य-स्वरूप सूर्यके सदृश नित्य प्रकाशमान है। जो उस अज्ञानरूप अंधकारसे अति परे सच्चिदानन्दघन परमेश्वरका सुमरण करता है। (9)
@@@ - 5:27 37% 0 Nolte oLTe X Next 4gf @zaucalt| श्रीमद ' भागवत गीता जी अध्याय १८ के श्लोक श्रीमद्धगवद्गीता नंबर ६२ में गीता ज्ञान दाता प्रभु कह रहा है। पाव हे अर्जुन! सर्वभाव से उस परमेश्वर की शरण ~lan Rsl; ' उसकी कृपा से तू परम शांति को और शाश्वत परमधाम को प्राप्त होगा ।अध्याय 8 के श्लोक नंबर 9 में गीता ज्ञान दाता प्रभु कहता है वह परमेश्वर कवियम है यानी कबीर है। Youl सन्सक्राइब Sant Rampal Ji Maharaj Tube कर Channel 8a [ "Sant Rampal Ji Maharaj" A 5:27 37% 0 Nolte oLTe X Next 4gf @zaucalt| श्रीमद ' भागवत गीता जी अध्याय १८ के श्लोक श्रीमद्धगवद्गीता नंबर ६२ में गीता ज्ञान दाता प्रभु कह रहा है। पाव हे अर्जुन! सर्वभाव से उस परमेश्वर की शरण ~lan Rsl; ' उसकी कृपा से तू परम शांति को और शाश्वत परमधाम को प्राप्त होगा ।अध्याय 8 के श्लोक नंबर 9 में गीता ज्ञान दाता प्रभु कहता है वह परमेश्वर कवियम है यानी कबीर है। Youl सन्सक्राइब Sant Rampal Ji Maharaj Tube कर Channel 8a [ "Sant Rampal Ji Maharaj" A - ShareChat