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श्री कृष्ण के गीता ज्ञान - गीता में निष्काम कर्म का सिद्धांत एक महत्वपूर्ण अवधारणा है, जिसका अर्थ है बिना किसी इच्छा या लोभ के कर्म करना। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश देते हुए कहा कि हमें अपने कर्मों के फल की चिंता नहीं करनी चाहिए, बल्कि हमें अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। निष्काम कर्म के कुछ महत्वपूर्ण पहलू हैंः कर्म का उद्देश्यः निष्काम कर्म का उद्देश्य अपने कर्तव्य का पालन करना है, न कि किसी gI व्यक्तिगत लाभ या इच्छा की पूर्ति के फल की चिंता नहींः हमें अपने कर्मों के फल की चिंता नहीं करनी चाहिए, क्योंकि फल तो भगवान के हाथ में है। निष्काम भावः हमें अपने कर्मों को निष्काम भाव से करना चाहिए, अर्थात बिना किसी इच्छा या लोभ के। कर्तव्य का पालनः हमें अपने कर्तव्य का चाहिए, चाहे वह कितना भी पालन करना कठिन क्यों न हो। गीता में निष्काम कर्म का सिद्धांत एक महत्वपूर्ण अवधारणा है, जिसका अर्थ है बिना किसी इच्छा या लोभ के कर्म करना। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश देते हुए कहा कि हमें अपने कर्मों के फल की चिंता नहीं करनी चाहिए, बल्कि हमें अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। निष्काम कर्म के कुछ महत्वपूर्ण पहलू हैंः कर्म का उद्देश्यः निष्काम कर्म का उद्देश्य अपने कर्तव्य का पालन करना है, न कि किसी gI व्यक्तिगत लाभ या इच्छा की पूर्ति के फल की चिंता नहींः हमें अपने कर्मों के फल की चिंता नहीं करनी चाहिए, क्योंकि फल तो भगवान के हाथ में है। निष्काम भावः हमें अपने कर्मों को निष्काम भाव से करना चाहिए, अर्थात बिना किसी इच्छा या लोभ के। कर्तव्य का पालनः हमें अपने कर्तव्य का चाहिए, चाहे वह कितना भी पालन करना कठिन क्यों न हो। - ShareChat