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#बेहतरीन उर्दू शायरी✍️ #🖋ग़ालिब की शायरी #🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️ #👍स्पेशल शायरी🖋 #😒दर्द भरी शायरी🌸
बेहतरीन उर्दू शायरी✍️ - मिर्ज़ा ग़ालिब बे वजाह नही रोता कोई इश्क़ मे ग़ालिब जिसे खुद से बढ़कर चाहो वो रुलाता ज़रूर है अहमद फराज़ मेरे आसूं पोछ कर बस ये बता दो मुझे रुलाने वाले ही अक़्सर क्यों याद आते हैं अल्लामा इक़बाल दिल से रोते हैं लोग मोहब्बत की याद मे इक़बाल ज़िन्दगी जन्नत हो जाती अगर इतने आंसु इबादत मे बहा देते मिर्ज़ा ग़ालिब बे वजाह नही रोता कोई इश्क़ मे ग़ालिब जिसे खुद से बढ़कर चाहो वो रुलाता ज़रूर है अहमद फराज़ मेरे आसूं पोछ कर बस ये बता दो मुझे रुलाने वाले ही अक़्सर क्यों याद आते हैं अल्लामा इक़बाल दिल से रोते हैं लोग मोहब्बत की याद मे इक़बाल ज़िन्दगी जन्नत हो जाती अगर इतने आंसु इबादत मे बहा देते - ShareChat