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#⛳रघुपति राघव राजा राम🙏 #🙏हे गोविन्द हे गोपाल🎶 #🌸 बोलो राधे राधे
⛳रघुपति राघव राजा राम🙏 - पता नहीं किस रूप पता नहीं किस रूप में आकार नारायण मिल जाएगा , निर्मल मन के दर्पण में बह राम के दर्शन पाएगा , नहीं किस रूप में आकार नारायण मिल जाएगा பI निर्मल मन के दर्पण में बह राम के दर्शन पाएगा सांस रुकी तेरे दर्शन को॰ न दुनिया में मेरा लगता है शबरी बांके बैठा हूं मेरा श्री राम में अटका मन बेकार मेरे दिल को मैं कितना भी समझा लूं॰ राम दरस के बाद दिल चोरेगा ये धड़कन तरेतायुगा काले युग प्राणि हूं पर जीता हूं मैं कर्ता हूं महसुस पर्लों को माना नेचो देखा युग देगा युग कलि का्ये पापीन के उपहारका चांद मेरा परगाने का हर प्राण को देगा सुख हूं मैं॰ राम भजन की आदत हरि कथा का वक्त राम आभारी शायरे मिल जो राही है दावत केमैं चोर कथान सूनरकेन दैचो हतूर्हें हरि कथा कच जाच्णा किथा विससत al पाने को दीदार प्रभु के नैन बड़े ये तरसे है जान सकेना कोईचिदनासतोंकोयेबरसे है किसे पता किस मौके पे, किस भूमि पे, किस कोने में, मेले मेंया बीराने में॰श्री हरिहमें दर्शन दे पता नहीं किस रूपमें आकार नासायणा मिल जाएगा, निर्मल मन के दर्पणा में बह राम के दर्शन पाएगा , नहीं किस रूप में आकार नारयण मिल जाएगा पत्ा निर्मल मन के दर्पण में बह राम के दर्शन पाएगा इंतजार में बैठा हूं कब बीतेगा ये काला युग , बीतेगी ये पीडा और भारी दिल के सारे दुख मिलने को हं बेकार पर पाप का मैं भागी भी जाएगी झुक, नाज़रीन मेरी आगे तेरेश्री हरि राम नाम से जुड़े हैं ऐसे खुद से भी ना मिल पाए कोईना जाने किस चेहरे में राम हमें कल मिल जाए वैसे तो मेरे दिल में हो पर आंखें प्यासी दर्शन की, शाम , सवेरे सारे मौसम राम गीत ही दिल गए ानी क्ा सार कुखे : वींटी अंधेरों को, रघुवीर ये दूर करो परेशानी ಿri ; शबरी बांके बैठा पर काले युग का प्राण हूं, पता नहीं किस रूप पता नहीं किस रूप में आकार नारायण मिल जाएगा , निर्मल मन के दर्पण में बह राम के दर्शन पाएगा , नहीं किस रूप में आकार नारायण मिल जाएगा பI निर्मल मन के दर्पण में बह राम के दर्शन पाएगा सांस रुकी तेरे दर्शन को॰ न दुनिया में मेरा लगता है शबरी बांके बैठा हूं मेरा श्री राम में अटका मन बेकार मेरे दिल को मैं कितना भी समझा लूं॰ राम दरस के बाद दिल चोरेगा ये धड़कन तरेतायुगा काले युग प्राणि हूं पर जीता हूं मैं कर्ता हूं महसुस पर्लों को माना नेचो देखा युग देगा युग कलि का्ये पापीन के उपहारका चांद मेरा परगाने का हर प्राण को देगा सुख हूं मैं॰ राम भजन की आदत हरि कथा का वक्त राम आभारी शायरे मिल जो राही है दावत केमैं चोर कथान सूनरकेन दैचो हतूर्हें हरि कथा कच जाच्णा किथा विससत al पाने को दीदार प्रभु के नैन बड़े ये तरसे है जान सकेना कोईचिदनासतोंकोयेबरसे है किसे पता किस मौके पे, किस भूमि पे, किस कोने में, मेले मेंया बीराने में॰श्री हरिहमें दर्शन दे पता नहीं किस रूपमें आकार नासायणा मिल जाएगा, निर्मल मन के दर्पणा में बह राम के दर्शन पाएगा , नहीं किस रूप में आकार नारयण मिल जाएगा पत्ा निर्मल मन के दर्पण में बह राम के दर्शन पाएगा इंतजार में बैठा हूं कब बीतेगा ये काला युग , बीतेगी ये पीडा और भारी दिल के सारे दुख मिलने को हं बेकार पर पाप का मैं भागी भी जाएगी झुक, नाज़रीन मेरी आगे तेरेश्री हरि राम नाम से जुड़े हैं ऐसे खुद से भी ना मिल पाए कोईना जाने किस चेहरे में राम हमें कल मिल जाए वैसे तो मेरे दिल में हो पर आंखें प्यासी दर्शन की, शाम , सवेरे सारे मौसम राम गीत ही दिल गए ानी क्ा सार कुखे : वींटी अंधेरों को, रघुवीर ये दूर करो परेशानी ಿri ; शबरी बांके बैठा पर काले युग का प्राण हूं, - ShareChat