#@@@ 💫कबीर साहेब कहते हैं –
“खाट पड़े तड़फराई, नयनन आवे नीर।
चेतन तब कुछ करे नहीं, तन व्यापे मृत्यु पीर॥”
अर्थ:🎯🎯 जब मनुष्य बुढ़ापे या बीमारी🧑🦼 में बिस्तर पर पड़कर तड़पता है, आँखों से आँसू बहते हैं और मृत्यु की पीड़ा शरीर को घेर लेती है, तब कुछ भी करने की शक्ति नहीं रहती।इसलिए जीवन रहते ही सच्चे सतगुरु की शरण लेकर परमात्मा की भक्ति करना ही मानव जीवन का सच्चा उद्देश्य है।
भक्ति करने वाला अंत समय में दुख से नहीं, बल्कि शांति से विदा होता है।🏯🏯


