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#@@@ 💫कबीर साहेब कहते हैं – “खाट पड़े तड़फराई, नयनन आवे नीर। चेतन तब कुछ करे नहीं, तन व्यापे मृत्यु पीर॥” अर्थ:🎯🎯 जब मनुष्य बुढ़ापे या बीमारी🧑‍🦼 में बिस्तर पर पड़कर तड़पता है, आँखों से आँसू बहते हैं और मृत्यु की पीड़ा शरीर को घेर लेती है, तब कुछ भी करने की शक्ति नहीं रहती।इसलिए जीवन रहते ही सच्चे सतगुरु की शरण लेकर परमात्मा की भक्ति करना ही मानव जीवन का सच्चा उद्देश्य है। भक्ति करने वाला अंत समय में दुख से नहीं, बल्कि शांति से विदा होता है।🏯🏯
@@@ - महाकष्टदायक CHF सदश कबीर, खाट पड़ तब झखई , नयनन आवै नीर| यत्तन तब कछु बनै नहीं , तनु व्याप मृत्यु पीर Il वृद्ध होकर या रोगी होकर जब मानव चारपाई पर पड़ा होता है और आँखों में आँसू बह रहे होते हैं, मृत्यु के समय उस समय कोई बचाव नहीं हा सकता , होने वाली पीडा हा रही होती है। कहते हैं कि जो भक्ति नहीं करते, उनका अन्त समय महाकष्टदायक होता है। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज SPIRITUAL LEADER RAMPAL JI { SANT @SAINTRAMPALIIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Ji MAHARAJ महाकष्टदायक CHF सदश कबीर, खाट पड़ तब झखई , नयनन आवै नीर| यत्तन तब कछु बनै नहीं , तनु व्याप मृत्यु पीर Il वृद्ध होकर या रोगी होकर जब मानव चारपाई पर पड़ा होता है और आँखों में आँसू बह रहे होते हैं, मृत्यु के समय उस समय कोई बचाव नहीं हा सकता , होने वाली पीडा हा रही होती है। कहते हैं कि जो भक्ति नहीं करते, उनका अन्त समय महाकष्टदायक होता है। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज SPIRITUAL LEADER RAMPAL JI { SANT @SAINTRAMPALIIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Ji MAHARAJ - ShareChat