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#भगवान_भरोसे_बस_स्टैंड : राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर का केंद्रीय रोडवेज बस स्टैंड उपेक्षा और बदहाली की मार्मिक तस्वीर प्रस्तुत कर रहा है। पूर्वी राजस्थान का यह प्रमुख परिवहन केंद्र है तथा यहां से रोजाना 150 रोडवेज बसों का संचालन और लगभग 15 हजार यात्रियों की आवाजाही होती है लेकिन बस स्टैंड आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। वर्षों पुराना जर्जर भवन बंद कर दिया गया था लेकिन उसके जीर्णोद्धार का काम शुरू ही नहीं किया गया है। पूरे बस स्टैंड का संचालन महीनों से एक अस्थायी टीन शेड के भरोसे चल रहा है। यात्रियों को गर्मी में भट्ठी, बारिश में टपकती छत और सर्दी में खुली सर्दी का सामना करना पड़ता है जबकि शौचालय, पेयजल और बैठने की उचित व्यवस्था का गंभीर अभाव है। आधुनिक मॉडल बस स्टैंड का सपना फाइलों में दब गया है, और यात्रियों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
प्राप्त जानकारी अनुसार भरतपुर में राजस्थान परिवहन निगम के दो डिपो (लोहागढ़ आगार और भरतपुर आगार) है तथा इन दोनों डिपो की बसें आगरा, मथुरा, दिल्ली, जयपुर, अलवर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर सहित कई बड़े शहरों और जिलों को जोड़ती हैं तथा त्योहारों, परीक्षाओं, शादियों और पर्यटन सीजन में यात्रियों की संख्या और भी बढ़ जाती है। फिलहाल पीक पर्यटन सीजन है पर इसके बावजूद यात्रियों को न तो पर्याप्त प्रतीक्षालय मिल पा रहा है, न ही बुनियादी सुविधाएं मिल रही है। टिकट खिड़की से लेकर बैठने की व्यवस्था तक सब कुछ टीन शेड के नीचे सिमट कर रह गया है। मुख्य प्रबंधक शक्ति सिंह ने कहा कि बस स्टैंड के नए भवन को लेकर फिलहाल मुख्यालय से कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। प्रक्रिया मुख्यालय स्तर पर लंबित है तथा जब तक वहां से स्वीकृति और बजट नहीं मिलता, तब तक निर्माण कार्य शुरू करना संभव नहीं है।
गौरतलब है कि शहर के हीरादास क्षेत्र में स्थित केंद्रीय बस स्टैंड का पुराना भवन वर्षों पहले ही जर्जर घोषित किया जा चुका था। समय-समय पर भवन की छत और दीवारों से प्लास्टर टूटकर गिरता रहता था। सुरक्षा कारणों से भवन का उपयोग धीरे-धीरे सीमित किया गया और आखिरकार अगस्त 2025 से बस स्टैंड का संचालन अस्थायी रूप से टीन शेड में शुरू कर दिया गया था तथा उस समय यह व्यवस्था कुछ दिनों या महीनों के लिए बताई गई थी लेकिन अब कई महीने बीत जाने के बावजूद न तो नए भवन का निर्माण शुरू हुआ और न ही कोई ठोस टाइमलाइन सामने आई है। कांग्रेस सरकार के समय 4 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे लेकिन वे नाकाफी थे। गर्मी के मौसम में टीन शेड तपकर भट्टी बन जाता है तथा बरसात में कई जगह से छत टपकने लगती है, फर्श पर पानी भर जाता है।


