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#🖋ग़ालिब की शायरी #🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️ #✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
🖋ग़ालिब की शायरी - जैसे कबड्डी में सांस रोककर पकड़ बनानी पड़ती है, वैसे ही ज़िंदगी की दौड़ में ठहरना भी सीखना पडता 81 राश्म प्रभा जैसे कबड्डी में सांस रोककर पकड़ बनानी पड़ती है, वैसे ही ज़िंदगी की दौड़ में ठहरना भी सीखना पडता 81 राश्म प्रभा - ShareChat