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#❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🗣कबीर अमृतवाणी📢
❤️जीवन की सीख - 7] माला मुद्रा तिलक छापा , तीरथ बरत में रिया भटकी। गावे बजावे लोक रिझावे , खबर नहीं अपने तन की।। हैं माला पहनने , तिलक लगाने , व्रत रखने ओर तीर्थ करने से कवीर साहेब जी कहते तरह सेजो लोग धार्मिक कथाएं जीव का आध्यात्मिक कल्याण नहीं होगा। इसी हैं भजन गाकर नाच कर लोगों को रिझाते हैं॰वो थी आम जनता को आत्म सुनाते कल्याण का उचित मार्गी नहीं दिखाते है। कबीर साहेब कहते हैंकि ज्ञानी और सच्चे साधू वे हैं जो शरीर को ही मंदिर मस्जिद मानते हैं और अपने शरीर के भीतर ही की कोशिश करते हें। जो अपनी देह के भीतर ईश्वर का दर्शन कर ढूंढने परमात्मा को लेता हे उसका जीवन सफल हो जाता है!! 7] माला मुद्रा तिलक छापा , तीरथ बरत में रिया भटकी। गावे बजावे लोक रिझावे , खबर नहीं अपने तन की।। हैं माला पहनने , तिलक लगाने , व्रत रखने ओर तीर्थ करने से कवीर साहेब जी कहते तरह सेजो लोग धार्मिक कथाएं जीव का आध्यात्मिक कल्याण नहीं होगा। इसी हैं भजन गाकर नाच कर लोगों को रिझाते हैं॰वो थी आम जनता को आत्म सुनाते कल्याण का उचित मार्गी नहीं दिखाते है। कबीर साहेब कहते हैंकि ज्ञानी और सच्चे साधू वे हैं जो शरीर को ही मंदिर मस्जिद मानते हैं और अपने शरीर के भीतर ही की कोशिश करते हें। जो अपनी देह के भीतर ईश्वर का दर्शन कर ढूंढने परमात्मा को लेता हे उसका जीवन सफल हो जाता है!! - ShareChat