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#🖋शेरो-शायरी #✍गुलजारांचे साहित्य
🖋शेरो-शायरी - भी कुछ अंदाज होते हैं मोहब्बत के जागती आंखों में भी ख्वाब होते है जरूरी नहीं कि ग़म में ही आंसू निकत मुस्कुराती आंखों में भी सैलाव " होते भी कुछ अंदाज होते हैं मोहब्बत के जागती आंखों में भी ख्वाब होते है जरूरी नहीं कि ग़म में ही आंसू निकत मुस्कुराती आंखों में भी सैलाव " होते - ShareChat